PM-USHA Revolution: छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान' (PM-USHA) राज्य के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा वरदान साबित हो रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को प्रभावी ढंग से लागू करने और शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने के लिए इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ को एक 'मेगा बजट' मिला है। इसके अंतर्गत चयनित शासकीय विश्वविद्यालयों को मल्टी-डिसिप्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटीज़ (MERU) के तहत 20 से 100 करोड़ रुपए और चिन्हित महाविद्यालयों को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 5 करोड़ रुपए तक का भारी-भरकम अनुदान दिया जा रहा है। इस पूरी योजना का वित्तीय भार केंद्र और राज्य सरकार 60:40 के अनुपात में मिलकर उठा रही हैं।
यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर तेजी से आकार ले रही है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा एमओयू (MoU) साइन करने के बाद कॉलेजों में अत्याधुनिक स्मार्ट क्लासरूम, हाई-टेक लैब और कंप्यूटर सेंटर बनाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। PM-USHA योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका समावेशी मॉडल है, जिसके तहत बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ वनांचलों से लेकर राज्य के सभी 33 जिलों को इसका सीधा फायदा पहुंच रहा है। विशेष रूप से कम नामांकन (GER) वाले क्षेत्रों और धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद जैसे आकांक्षी जिलों के शासकीय कॉलेजों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि भौगोलिक दूरियों को खत्म कर आधुनिक शिक्षा को हर गांव और कस्बे तक आसानी से पहुंचाया जा सके।
सरकार के इस दूरदर्शी कदम से प्रदेश के विभिन्न शासकीय शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले 5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं। इस महा-क्रांति का सबसे ज्यादा फायदा ग्रामीण परिवेश के युवाओं, विशेषकर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और महिला वर्ग के विद्यार्थियों को मिल रहा है। जो युवा अब तक आधुनिक संसाधनों से वंचित थे, उन्हें अब अपने ही जिले में वैश्विक स्तर की रिसर्च (अनुसंधान) और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की सुविधाएं मिल रही हैं। यह योजना न केवल वनांचलों के युवाओं के सपनों को एक नई उड़ान दे रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ के सुनहरे भविष्य की एक बेहद मजबूत नींव भी तैयार कर रही है।












