Bastar News: कीचड़ और दुर्गम रास्तों को पार कर नक्सल पीड़ित परिवारों तक पहुंचे डॉ. प्रेमा साईं, आर्थिक मदद के साथ दिया भरोसा


छत्तीसगढ़ 02 September 2026
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Bastar News: कीचड़ और दुर्गम रास्तों को पार कर नक्सल पीड़ित परिवारों तक पहुंचे डॉ. प्रेमा साईं, आर्थिक मदद के साथ दिया भरोसा

बीजापुर। बस्तर के अंदरूनी और दुर्गम इलाकों में नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर उनका हाल जानने और सहयोग देने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज यमपुर (पामेड़) और नेलाकांकेर पहुंचे। बारिश के कारण रास्तों में कीचड़ और आवागमन में आई परेशानियों के बावजूद उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी और नक्सल हिंसा में अपनों को खो चुके परिवारों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों की आर्थिक मदद करने के साथ महिलाओं और बच्चों को कपड़े तथा जरूरत की सामग्री भी वितरित की।

यमपुर पहुंचने के दौरान बारिश और कीचड़ के कारण काफिले को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। एक वाहन कीचड़ में फंस गया, जबकि एक अन्य वाहन खराब हो गया। इसके बावजूद डॉ. प्रेमा साईं ने ग्रामीणों तक पहुंचने का निर्णय नहीं बदला। उन्होंने नक्सल हिंसा में वर्ष 2025 में जान गंवाने वाले सुन्नम सम्मैया और वेक्को संदीप के परिवारों से मुलाकात की। सुन्नम सम्मैया की पत्नी नर्सम्मा और उनके दो छोटे बच्चों से उन्होंने बातचीत कर परिवार की परिस्थितियों की जानकारी ली। वहीं वेक्को संदीप की पत्नी आरती और उनके नौ वर्षीय पुत्र से भी मुलाकात की। दोनों परिवारों को 21-21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। महिलाओं को साड़ी तथा बच्चों को कपड़े, कॉपी, पेन, कंपास बॉक्स और चप्पल वितरित की गईं। ग्रामीणों को दिव्य कवच और भभूति भी प्रदान की गई।

ग्रामीणों के साथ बैठकर किया भोजन, सुनी समस्याएं

डॉ. प्रेमा साईं ने यमपुर में ग्रामीणों के साथ समय बिताया और उनके बीच बैठकर भोजन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं और क्षेत्र की परिस्थितियां उनके सामने रखीं। सहज और आत्मीय व्यवहार के कारण ग्रामीणों में उनके प्रति अपनत्व का भाव दिखाई दिया। इसके बाद वे नेलाकांकेर पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। यहां उन्होंने वर्ष 2026 में नक्सल हिंसा में मारे गए 40 वर्षीय तिरुपति सोढ़ी के परिवार से मुलाकात की। तिरुपति सोढ़ी की पत्नी शांति और उनके पांच बच्चों की स्थिति जानने के बाद उन्होंने परिवार को 31 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी और भविष्य में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

बेटी की शादी का पूरा खर्च उठाने की घोषणा

नेलाकांकेर में तिरुपति सोढ़ी के परिवार से मुलाकात के दौरान डॉ. प्रेमा साईं ने उनकी बेटी संध्या की शादी को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि संध्या की शादी का पूरा खर्च वह स्वयं उठाएंगे और कन्यादान भी करेंगे। इस घोषणा के बाद परिवार के सदस्यों के साथ मौजूद ग्रामीण भी भावुक हो गए। यह पहल केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रहकर पीड़ित परिवार की जिम्मेदारी साझा करने के रूप में सामने आई।

इसके बाद उन्होंने 23 वर्षीय रवि कट्टम के परिवार से भी मुलाकात की। रवि की वर्ष 2026 में नक्सल हिंसा में मृत्यु हुई थी और वह अपने परिवार की इकलौती संतान थे। परिवार की परिस्थितियों को समझने के बाद डॉ. प्रेमा साईं ने 31 हजार रुपये की सहयोग राशि प्रदान की। उन्होंने परिवार को भविष्य में भी यथासंभव सहायता का भरोसा दिलाया।

बच्चों को बांटे कपड़े और स्कूल सामग्री, खुद पहनाई चप्पल

सहायता वितरण के दौरान बच्चों के प्रति डॉ. प्रेमा साईं का आत्मीय व्यवहार भी देखने को मिला। उन्होंने बच्चों को कपड़े, स्कूल बैग, कॉपी, पेन, कंपास बॉक्स और चप्पल वितरित कीं। इस दौरान उन्होंने कई बच्चों को अपने हाथों से चप्पल पहनाई और उन्हें दुलार किया। बच्चों के हाथों में स्कूल सामग्री और पैरों में चप्पल देखकर परिवारों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी। महिलाओं को भी साड़ियां वितरित की गईं।

बोले—पीड़ित परिवारों को महसूस होना चाहिए कि वे अकेले नहीं

डॉ. प्रेमा साईं ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों की पीड़ा केवल उनकी व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। ऐसे परिवारों के बीच पहुंचना, उनकी समस्याएं सुनना और आवश्यकता के समय उनके साथ खड़ा होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सहायता का उद्देश्य केवल आर्थिक सहयोग देना नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवारों को यह विश्वास दिलाना भी है कि वे अकेले नहीं हैं और समाज उनके साथ खड़ा है।

ग्रामीणों से संवाद के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा का उल्लेख करते हुए उन्हें ‘देव पुरुष’ बताया। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और सामान्य जीवन की उम्मीद को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का लाभ सबसे अधिक आम ग्रामीणों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों तक पहुंचना चाहिए।

बारिश, कीचड़, खराब वाहनों और दुर्गम रास्तों के बीच यमपुर से नेलाकांकेर तक की यह यात्रा नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के बीच मानवीय सहयोग और भरोसे का संदेश लेकर पहुंची। आर्थिक सहायता के साथ बच्चों की शिक्षा सामग्री, कपड़े और परिवारों के साथ आत्मीय संवाद ने इस पहल को राहत से आगे बढ़कर सामाजिक सहारे का रूप दिया।

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