बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय पहचान और भाषाई गौरव को प्रमुखता देने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल की शुरुआत की गई है। बिलासपुर स्थित देश के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) ने अपनी सभी अकादमिक डिग्रियों, अंकतालिकाओं (मार्कशीट) और तमाम आधिकारिक दस्तावेजों में अब अंग्रेजी शब्द 'इंडिया' (India) के स्थान पर पूरी तरह से 'भारत' (Bharat) शब्द का उपयोग करने का एक बड़ा और नीतिगत निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के इस ऐतिहासिक फैसले की चौतरफा सराहना की जा रही है और इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मूल सिद्धांतों के अनुरूप माना जा रहा है।
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (Central University) द्वारा शुरू की गई इस गौरवमयी मुहिम का असर अब राज्य के अन्य बड़े विश्वविद्यालयों में भी देखने को मिल रहा है। दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय ने भी इस व्यवस्था को अपने यहाँ लागू करने की प्रशासनिक तैयारी और प्रक्रिया तेज कर दी है। आने वाले समय में इन विश्वविद्यालयों से स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध की उपाधि प्राप्त करने वाले लाखों छात्र-छात्राओं के प्रमाण-पत्रों पर गर्व से 'भारत' शब्द अंकित होगा। शिक्षाविदों का मानना है कि यह बदलाव केवल शाब्दिक नहीं है, बल्कि यह भावी पीढ़ी के भीतर अपनी जड़ों, प्राचीन संस्कृति और मातृभूमि के प्रति अगाध प्रेम और गौरव की भावना को सुदृढ़ करने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।
दस्तावेजों और डिग्रियों में 'भारत' शब्द के उपयोग के साथ-साथ विश्वविद्यालय अपने दीक्षांत समारोहों (Convocation) के स्वरूप को भी पूरी तरह से भारतीय रंग में ढालने जा रहा है। अब तक दीक्षांत समारोहों में पहने जाने वाले औपनिवेशिक काल के ब्रिटिश गाउन और टोपी की परंपरा को पूरी तरह से विदा कर दिया गया है। इसके स्थान पर भारतीय पारंपरिक परिधानों जैसे खादी के कुर्ते, पायजामे, साड़ियों और स्थानीय संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले पारंपरिक कोसा के जैकेट व दुपट्टों को अनिवार्य किया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि दीक्षांत समारोह किसी भी छात्र के जीवन का सबसे बड़ा और स्मरणीय क्षण होता है, इसलिए इसका पूरी तरह से भारतीय और सांस्कृतिक परिवेश में होना अत्यंत आवश्यक है।
उच्च शिक्षा विभाग और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत लिए गए इस निर्णय को लेकर विद्यार्थियों और प्राध्यापकों के बीच भारी उत्साह का माहौल है। रायपुर स्थित राजभवन और कलेक्ट्रेट के प्रशासनिक हल्कों में भी इस पहल को छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा इतिहास का एक मील का पत्थर बताया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि छत्तीसगढ़ के इन प्रमुख विश्वविद्यालयों द्वारा उठाया गया यह अनुकरणीय कदम जल्द ही राज्य के अन्य निजी और शासकीय विश्वविद्यालयों के लिए भी एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा। इस निर्णय के लागू होने से डिग्रियों के प्रारूप (Format) को वैश्विक मानकों के अनुरूप रखते हुए उसमें पूरी तरह से भारतीयता का समावेश सुनिश्चित किया जा सकेगा।













